सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अर्जुन की छाल के फायदे,Arjun ki chal ke fayde

 Arjun ki chal ke fayde


 अर्जुन की छाल के फायदे

आज हम जानेंगे अर्जुन वृक्ष की छाल के बारे में।अर्जुन वृक्ष का वैज्ञानिक नाम टर्मिमिनेलिया अर्जुना है. भिन्न-भिन्न स्थानों पर  इसे धवल, कुकुभ और नाडिसार्ज जैसे नामों से भी जानते हैं. आयुर्वेद में अर्जुन वृक्ष स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है।अर्जुन वृक्ष एक सदाबहार यानी हमेशा हरा-भरा आने वाला वृक्ष है. अर्जुन वृक्ष का नाम प्रमुख औषधीय वृक्षों में है. इसका उपयोग हृदय रोग के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है। अर्जुन वृक्ष के छाल के चूर्ण, काढ़ा, अरिष्ट आदि के रूप में उपयोग किया जाता है।


तो आइए जानते हैं अर्जुन वृक्ष की छाल के कुछ महत्वपूर्ण फायदे।


अर्जुन की छाल के फायदे - Arjun ki Chhal Ke Fayde in Hindi

1. उच्च रक्तचाप में अर्जुन की छाल का प्रयोग  - :

उच्च रक्तचाप में अर्जुन की छाल का उपयोग बहुत ही गुणकारी माना जाता है। अर्जुन की छाल कोलेस्ट्रॉल को कम करके लिपिड ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी घटाती हैं।इसके छाल का सेवन रक्त प्रवाह के अवरोध को भी दूर करता है। इसके लिए आपको एक चम्मच अर्जुन वृक्ष की छाल का पाउडर दो गिलास पानी में आधा रह जाने तक उबालकर इस पानी को सुबह-शाम पिएं. ऐसा करने से बंद हुई धमनियां खुल जाएंगी और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम हो जाएगा.

2 .बालों के विकास के लिए

अर्जुन वृक्ष की छाल का उपयोग हम बालों के विकास के लिए भी कर सकते हैं. सर के बाल में अर्जुन वृक्ष की छाल और मेहंदी का मिश्रण लगाने से सर के बाल सफेद से काले होने लगते हैं. इससे बालों में मजबूती भी आती है.

3. खांसी में

सूखे हुए अर्जुन वृक्ष की छाल का बारीक पाउडर, ताजे हरे अडूसे के पत्तों के रस में मिलाकर इसे फिर से सुखा लें. ऐसा इसी तरह से मिला-मिला कर सात बार के बाद जो चूर्ण बचता है. उसमें शहद मिलाकर खांसी पीड़ित को देने से वो राहत महसूस करता है.

4. मोटापा दूर करने में

मोटापे से परेशान लोग अर्जुन वृक्ष की छाल का काढ़ा सुबह शाम पीकर अपनी परेशानी कम कर सकते हैं. यह मोटापे को इतनी तेजी से कम करता है कि एक महीने में ही इसका असर दिखने लगता है.

4.शुगर में

शुगर के मरीज भी अर्जुन वृक्ष की छाल से अपनी परेशानी खत्म कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें अर्जुन वृक्ष की छाल का चूर्ण, देसी जामुन के बीजों के चूर्ण की समान मात्रा के साथ मिलाकर सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लें. दूसरा विकल्प है कि अर्जुन वृक्ष के छाल, कदम की छाल, जामुन की छाल और अजवायन एक समान मात्रा, पीसकर बारीक पाउडर बना लें. इस पाउडर में आधा लीटर पानी मिलाकर काढ़ा बनाएं और इस काढ़े को सुबह शाम 3 सप्ताह तक लगातार प्रयोग करें. इससे मधुमेह में राहत मिलेगी.

5. त्वचा के लिए

त्वचा की कई समस्याओं को खत्म करने में अर्जुन वृक्ष के छाल का असर प्रभावशाली होता है. अर्जुन वृक्ष की छाल, बदाम, हल्दी और कपूर की एक समान मात्रा को पीस कर उबटन की तरह चेहरे पर लगाएं ऐसा करने से चेहरे के सारे रिंकल्स चले जाते हैं और चेहरे में निखार आता है.

6. मुंह के छालों के उपचार में

मुंह के छालों से परेशान व्यक्ति भी अर्जुन की छाल का उपयोग कर सकता है. इसके लिए नारियल के तेल में अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से आपकी परेशानी निश्चित रूप से कम होगी. यही नहीं ऐसे थोड़े गुड़ के साथ लेने से बुखार में भी आराम मिलता है.

7. पेशाब की रुकावट दूर करने में

अर्जुन वृक्ष की छाल से बना हुआ काढ़ा पीने से पेशाब की रुकावट दूर होती है. इसके लिए अर्जुन वृक्ष की छाल को पीसकर दो कप पानी में उबालें जब जब पानी आधा रह जाए तो इसे ठंडा होने के बाद रोगी को पिलाएं. दिन में एक बार पिलाने से यह पेशाब की रुकावट को दूर कर देता है.

8. सूजन को कम करने में

भी अर्जुन वृक्ष के छाल की सकारात्मक भूमिका है. इसके लिए अर्जुन वृक्ष की छाल का महीन पिसा हुआ चूर्ण 5 से 10 ग्राम मात्रा में क्षीरपाक विधि से खिलाने से हृदय रोग के साथ-साथ इससे पैदा होने वाली सूजन में भी कमी आती है. इसके अलावा लगभग 1 से 3 ग्राम चूर्ण खिलाने से सूजन में कमी आती है. उससे संबंधित परेशानियां भी दूर होती हैं

9. हृदय के विकारों में

ह्रदय से संबंधित तमाम विकारों जैसे की अनियमित धड़कन और सूजन आदि को दूर करने में भी अर्जुन वृक्ष का छाल सहायक होता है. यह स्ट्रोक के खतरे को भी कम करती है. इसके लिए अर्जुन वृक्ष की छाल को जंगली प्याज की समान मात्रा के साथ मिलाकर चूर्ण बनाएं इस चूर्ण को रोजाना आधा चम्मच दूध के साथ हृदय रोगी को देने से हृदय की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है. ये ब्लॉकेज में भी लाभदायक होता है. खाना खाने के बाद दो चम्मच लगभग 20 mm अर्जुनारिष्ट आधा कप पानी में मिलाकर दो 3 माह तक पीने से हृदय रोगियों को तमाम परेशानियों से मुक्ति मिलती है.

अर्जुन वृक्ष के छाल के नुकसान - Arjun ki Chhal Ke Nuksan in Hindi

अर्जुन वृक्ष की छाल के नुकसान गर्भवती महिलाएं इसके उपयोग में सावधानी बरतें.


जहां तक संभव हो चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Aloevera benefits in Hindi धृतकुमारी ALOEVERA

घृतकुमारी ALOEVERA (Aloevera Benefits in Hindi) घृतकुमारी एक औषधीय वनस्पति है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में धृत कुमारी के  औषधीय गुणो की महिमा का बहुत वर्णन किया है। इसका विधि पूर्वक सेवन करने से एक स्वस्थ व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए निरोगी जीवन व्यतीत कर सकता है तथा दूसरी ओर यदि कोई रोगी व्यक्ति रोगानुसार विधि पूर्वक इसका  सेवन करें तो वह स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता हैं। इसका पौधा भारत में सर्वत्र पाया जाता है। औषधीय गुणों के साथ साथ  सुंदर दिखने की वजह से कुछ लोग इसे गमलों में लगाकर अपने घरों में रखते है। इसमें कांड नहीं होता जड़ के ऊपर से ही चारों तरफ मासल गुद्दे से परिपूर्ण एक से दो इंच  मोटे होते हैं। इसके पत्तों को काटने पर पीताम वर्ण का पिच्छिल द्रव्य निकलता है। जो ठंडा होने पर जम जाता है, जिसे  कुमारी सार कहते हैं। वर्तमान समय में अनेक आयुर्वेदिक औषधियों में इसका प्रयोग किया जाता है। इसकी अधिक डिमांड होने की वजह से भारतवर्ष में व्यापक रूप से इसकी खेती की जाती है। शुष्क भूमि में भी इसकी खेती आसानी से हो जाती है। इसकी खेती में अधिक जल की आवश्यकता...

सफेद मूसली के फायदे।, Safedmusli benefits in Hindi

सफेद मूसली के फायदे (Safedmusli benefits in Hindi) सफेद मूसली का परिचय सफेद मूसली एक शक्तिवर्धक औषधीय वनस्पति है जिसका आयुर्वेदिक औषधियों में बहुत प्रयोग किया जाता है। सफेद मूसली के जड़ और बीज का औषधियों में अधिक महत्व होता है। आयुर्वेद में अनेकों औषधियों के निर्माण में सफेद मूसली का प्रयोग किया जाता है। विशेषकर शक्तिवर्धक और वाजीकरण औषधिओं में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ों में  कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, पोटैशियम ,फाइबर , कैल्शियम तथा मैग्नीशियम आदि तत्व पाए जाते हैं। इसका कंद औषधीय गुणों से भरपूर होता है जिसका प्रयोग अनेकों रोगों में किया जाता है। यह एक अद्भुत औषधि है।  यह कामोत्तेजक और कफ को हरने वाला माना जाता है। यह हृदय विकार और डायबिटीज जैसे रोगों में भी बहुत फायदा करता है।यह सांस के रोग में बहुत लाभकारी माना जाता है। और खून की कमी या अनिमिया जैसे रोगों को दूर करता है इसके अलावा यह अनेकों रोगों में इसका अन्य औषधियों के साथ प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है। आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि सफेद मूसली का अन्य औषधियों के साथ प्रयोग करके बहुत रोगों को नष्ट...

Mal Kangni ke fayede in hindi मालकांगनी ( ज्योतिषमति) के फायदे

मालकांगनी के फायदे (Malkangni Benefits in Hindi ) मालकांगनी एक औषधीय वनस्पति है इसे ज्योतिषमति के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसके गुणों का विस्तार से  वर्णन किया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार कई रोगों में इसका प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के महान ऋषि ने अपनी पुस्तक चरक संहिता में इस औषधि के कई रोगों में प्रयोग के बारे में वर्णन किया है। परंतु विशेष रूप से उन्होंने इस औषधि का प्रयोग शिरोविरेचनार्थ, अपस्मार, कुष्ठ और मिर्गी जैसे रोगों में विशेष रूप से औषधीय प्रयोग करने का वर्णन किया गया है। मालकांगनी का प्रयोग तेज दिमाग, कमजोरी दूर करना, और पुरुषों के रोगों में भी प्रयोग किया जाता है। मालकांगनी की प्रकृति गरम होती है इसके फूल पीले और हरे रंग के होते हैं और स्वाद में खाने में थोड़ा कड़वापन होता है। इसके फलों, पत्तों और जड़ों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसके बीजों को औषधि के लिए अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्म तासीर के व्यक्ति को  इसका प्रयोग अपना बल विचार करके या किसी वैद्य के निर्देशानुसार करना चाहिए। मालकांगनी के पौधे पहाड़ों और ऊंचे स्था...