गोरखमुंडी GORAKHMUNDI
आयुर्वेद में गोरखमुंडी एक महत्वपूर्ण औषधिय वनस्पति के रूप में जानी जाती है। इस औषधि को मुंडी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी कथा प्रचलित है कि इस औषधि का नाम पहले मुंडी था लेकिन बाद में गोरखमुंडी पड़ा। इसके पीछे यह कथा प्रचलित है कि एक बार उत्तरांचल में श्री गोरक्षनाथ ने अपना डेरा लगाया हुआ था। उस समय उस क्षेत्र के लोग अनेकों बीमारियों से पीड़ित थे। जब उस क्षेत्र के लोग श्री गुरु गोरक्षनाथ के पास जाकर यह प्रार्थना करने लगे कि हे प्रभु हमें इन रोगों से कैसे छुटकारा मिले और हम कैसे स्वस्थ हो, तब श्री गुरु गोरक्षनाथ ने कृपा कर उन लोगों को मुंडी नामक औषधि को अभिमंत्रित करके औषधि के रूप में प्रदान किया, तो उस क्षेत्र के लोगों को इस औषधि से अनेकों रोगों से छुटकारा मिला। तब इस औषधि का नाम गोरखमुंडी के नाम से विख्यात हुआ।
गोरखमुंडी वैसे तो समस्त भारत में पाई जाती है परंतु हिमाचल प्रदेश में यह ज्यादा मात्रा मैं पैदा होती है। धान के खेतों अथवा जंगलों में इसके पोधे अधिक मिलते हैं। इसमें शीतकाल में पुष्प और बाद में फल लगते हैं। इसका पौधा आसानी से घर में भी उगाया जा सकता है। बाजार में पंसारी की दुकान पर गोरखमुंडी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
गोरखमुंडी का गुणधर्म -- गोरखमुंडी मे तिक्त क्षाराभ (Alkaloid ) स्फेरैन्थिन तथा ग्लूकोसाइड नामक तत्त्व पाया जाता है। इससे एक रक्तदाभ सुगंधित तेल भी प्राप्त होता है, जिसमें यूजिनॉल आसिमिन आदि घटक पाये जाते हैं। यह वनस्पति दिल, दिमाग, जिगर और मैदे को ताकत देती है। दिल की धड़कन, दहशत, प्लीहा, पीलिया, आंखों का पीलापन, पित्त और वात में पैदा हुई बीमारियों में यह बहुत लाभदायक मानी जाती है। मूत्र और गर्भाशय की जलन दूर करती है। कंठमाला अक्षयजनित ग्रंथियां, तर और खुश्क खुजली, दाद, कोढ और वात संबंधी रोगों में यह बहुत लाभदायक है। गोरखमुंडी कटु तिक्त आदि गुणों के कारण अपस्मार, गलगंण्ड एवं श्लीपद आदि रोगों का नाश करती है।
गोरखमुंडी के औषधीय प्रयोग
(1) सिर दर्द -- 3 से 5 ग्राम गोरखमुंडी का स्वरस ले और उसमें 1/4 ग्राम की मात्रा में कालो मिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रातः सायं पिलाने से आधासीसी और अन्य सभी प्रकार के सर दर्द जैसे रोगों में अवश्य ही लाभ मिलता है।(2) सफेद बाल काले हो जाते हैं --- गोरखमुंडी की जड़ या पंचांग को पुष्पा गमन से पूर्व लेकर और उसके साथ सम मात्रा में काले भांगरे अथवा सामान्य भृंगराज को छाया मे शुष्क कर ले, और दोनों का चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण को 2 से 8 ग्राम की मात्रा में मधु के साथ मिलाकर 40 से 80 दिनों तक सेवन करने से बालों के सभी प्रकार के रोग समाप्त हो जाते हैं तथा सफेद बाल काले होने आरंभ हो जाते हैं इसमें कोई संदेह नहीं।
(3) नेत्र रोगों में गोरखमुंडी का प्रयोग --- (i) एक साबूत मुंडी ले और उसे साबुत निगल जाएं, ऐसा लगातार 7 दिन करने से एक वर्ष तक आंखें कभी नहीं दुखती।
(ii) गोरखमुंडी का चूर्ण तैयार कर लें और लगभग 4 ग्राम चूर्ण गाय के दूध के साथ सुबह-शाम लगभग 60 दिन सेवन करने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है।
(iii) यदि किसी की नेत्रों की ज्योति बहुत कम हो गई है तो दिन में दो या तीन बार गोरखमुंडी के पत्तों का स्वरस आंखों में लगातार कुछ दिन लगाने से अवश्य ही आंखों की रोशनी तेज हो जाती है।
(iv) गोरखमुंडी के पंचांग को पानी में घोटकर उसे तांबे के बर्तन में रख दें। और सुबह उस पानी से रूई को भिगोकर आंखों पर रखने से आंखों के कई प्रकार के रोग समाप्त हो जाते हैं और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
(4) हृदय की कमजोरी में गोरखमुंडी का प्रयोग --- गोरखमुंडी के फलों का अर्क निकाल कर लगभग 15 से 30 ग्राम की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करने से हृदय की दुर्बलता ठीक हो जाती है। परन्तु विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस औषधि का सेवन करते समय खट्टा, तेल, घी और गर्म चीजों का परहेज रखना है।
(5) वायु दोष में गोरखमुंडी का प्रयोग --- गाय या बकरी के दूध के साथ 4 ग्राम गोरखमुंडी का चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से वायु दोष दूर होते हैं और उदर संबंधी सभी रोगों में लाभ मिलता है।
(6) आम अतिसार में गोरखमुंडी का प्रयोग --- गोरखमुंडी और सौंफ को समान मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण तैयार कर लें फिर इस चूर्ण को मिश्री युक्त जल के साथ सेवन करने से आम अतिसार रोग में लाभ मिलता है।
(7) कृमि रोग में गोरखमुंडी का प्रयोग --- सुबह खाली पेट लगभग 4 ग्राम गोरखमुंडी का चूर्ण ताजे जल के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं और कृमि रोग से छुटकारा मिलता है।
(8) भगंदर रोग में गोरखमुंडी का प्रयोग --- शाम के समय मिट्टी की कोरी हांडी में पानी भरकर रख ले सुबह उठकर उस बासी पानी के साथ गोरखमुंडी का चूर्ण खाली पेट सेवन करने से भगंदर और बवासीर जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं। परंतु इसमें विशेष ध्यान इस बात का दे कि तेल, खटाई और गर्म चीजों का परहेज रखें।
(9) प्रमेह रोग में गोरखमुंडी का प्रयोग --- (i) मिश्री युक्त गाय के दूध के साथ दिन में 4 ग्राम की मात्रा में लगातार 40 दिन गोरखमुंडी के चूर्ण का सेवन करने से प्रेमह जैसा रोग समाप्त हो जाता है।
(10) यौवन दौर्बल्य में गोरखमुंडी का प्रयोग --- (i) गोरखमुंडी के चूर्ण के साथ समान मात्रा में खांड मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक दुर्बलता समाप्त होती है, और शरीर बलवान बनता है।
(ii) गोरखमुंडी के बीजों मे 1/2 भाग मिश्री मिलाकर चूर्ण तैयार कर ले। अब घी मिश्रित दूध के साथ सुबह शाम 10 ग्राम चूर्ण 60 दिन तक सेवन करने से सभी तरह की शारीरिक दुर्बलता समाप्त हो जाती है। इसके सेवन से वृद्ध व्यक्ति भी स्त्री भोग करने मे अवश्य ही सक्षम हो जाता है इसमें कोई संदेह नहीं।
(11) चरम रोग में गोरखमुंडी का प्रयोग --- गोरखमुंडी के पत्तों का स्वरस निकाल लें। और फिर चर्म रोग से प्रभावित अर्थात जहां पर खाज, खुजली या कोढ जैसा रोग हो ऐसे स्थान पर उस स्वरस को दिन में दो तीन बार लगाएं। ऐसा करने से शीघ्र ही कोढ, दाद, खाज, खुजली जैसे भयंकर रोग अवश्य ही समाप्त हो जाते हैं।
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