आयुर्वेदिक चिकित्सा शास्त्र में हमारे शारीरिक संरचना पर गहराई से अध्ययन किया गया है। शारीरिक चिकित्सा करने से पहले हमें शारीरिक संरचना एवं कार्य प्रणाली के विषय में जानना आवश्यक हो जाता है। हमारे शरीर की संरचना कैसी है और यह किस तरह सुचारू रूप से काम करता है यह बड़ा अद्भुत भी है और वैज्ञानिक भी। वैज्ञानिक रूप से हम अपने शरीर के बारे में जानकर उसके कार्य प्रणाली का विश्लेषण कर सकते हैं। हमारा शरीर एक लयबद्ध (हारमोनी) में काम करता है। विशेष रूप से हमें यह ज्ञान होना चाहिए कि हमारा शरीर आखिर है क्या । ईश्वर ने हमारा शरीर तंत्र एक आश्चर्यजनक तरीके से अद्भुत तंत्र प्रणाली (mechanism) से निर्मित किया है। जब हम अपने शरीर की कार्यप्रणाली को ध्यान से देखते हुए अनुभव करते हैं तो हमारी यह जिज्ञासा बढ़ जाती है कि हमारा शरीर किस तरह से काम करता है। चिकित्सा शास्त्र में तो यह आवश्यक हो जाता है कि हम पहले अपने शरीर का विश्लेषण करें कि हमारा शरीर किस स्थिति में है और कैसे कार्य कर रहा है। यह सब जानकर ही हम किसी व्यक्ति की चिकित्सा आरंभ कर सकते हैं। लंबी आयु तक स्वस्थ एवं निरोगी जीवन व्यतीत करने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने शरीर की देखभाल ठीक ढंग से करें और यह केवल उसी अवस्था में संभव है जब हमें अपने शरीर की संरचना तथा कार्य प्रणाली आदि के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त हो।
शारीरिक संरचना :- हमारा शरीर अनगिनत छोटी-छोटी कोशिकाओं से बना है जिन्हें अंग्रेजी में सेल कहते हैं । यह सेल हमारे शरीर में रक्त हड्डियों त्वचा मांसपेशियों तथा अन्य अंगों का निर्माण करते हैं। तथा इन सभी सेल्स की आंतरिक संरचना को एक जैसी होती है किंतु यह आकार प्रकार से भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए मस्तिष्क के सबसे छोटे आकार अर्थात कुल 0.003 मिली मीटर के होते हैं तथा डिंब सेल्स सबसे बड़े आकार अर्थात 0•20 मिलीमीटर के होते हैं यद्यपि प्रत्येक सैल स्वयं में एक स्वतंत्र इकाई होता है किंतु यह अक्षर समूह के रूप में कार्य करते हैं। एक ही प्रकार के अनेक शब्द समूह के रूप में एक ही कार्य करते हैं तो उन्हें उत्तक कहते हैं। मांसपेशिया हड्डियां व नसे उत्तको का ही रूप है।
इसी प्रकार जब भिन्न-भिन्न प्रकार के उत्त एक साथ मिलकर एक ही कार्य करते हैं तो शरीर के विभिन्न अंगों का निर्माण करते हैं। शरीर के विभिन्न अंग अर्थात अवयव जब एक साथ मिलकर किसी विशिष्ट कार्य को संपादित करते हैं तो उसे तंत्र कहते हैं। हमारा शरीर कुल 10 प्रकार के तंत्रों से मिलकर बना है।
(1) अस्थि तंत्र
(2) पेशीय तंत्र
(3) स्नायु अथवा तंत्रिका तंत्र
(4) अंतः स्रावी तंत्र
(5) हृदय में रक्त परिसंरचरण तंत्र
(6) पाचन तंत्र
(7) उत्सर्जन तंत्र
(8) प्रजनन तंत्र
(9) स्वसन तंत्र
(10) लसीका संवहन तंत्र
(1) अस्थि तंत्र
(2) पेशीय तंत्र
(3) स्नायु अथवा तंत्रिका तंत्र
(4) अंतः स्रावी तंत्र
(5) हृदय में रक्त परिसंरचरण तंत्र
(6) पाचन तंत्र
(7) उत्सर्जन तंत्र
(8) प्रजनन तंत्र
(9) स्वसन तंत्र
(10) लसीका संवहन तंत्र
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