सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पाचन तंत्र , Digestive system, हमारे शरीर में पाचन तंत्र कैसे काम करता है।

 पाचन तंत्र

हम जो भोजन करते हैं उस भोजन को शरीर के द्वारा पचाने की क्रिया को पाचन तंत्र कहते हैं ।  पाचन तंत्र के रोगों के विषय में चर्चा प्रारंभ करने से पूर्व पाचन तंत्र व उसकी कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक है। यह तो सभी जानते हैं कि शरीर चलायमान रहने के लिए भोजन आवश्यक है ।भोजन प्राप्त करने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है,  जिस ऊर्जा से ही शरीर काम कर पाता है। हम जो भोजन करते हैं उस भोजन में से शरीर के यंत्रों द्वारा सामूहिक उद्योग करके पोषक तत्व प्राप्त किए जाते हैं। और उसी से ही शरीर में  ऊर्जा का प्रवाह होता है। किंतु भोजन में समाहित पोषक तत्व रक्त में शामिल हो इसके लिए भोजन का टुकड़ों में बटना आवश्यक है ,भोजन के पाचन द्वारा उसमें समाहित पोषक तत्व शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाने व अवशेष को मल के रूप में उत्सर्जित करने का महत्वपूर्ण कार्य पाचन तंत्र द्वारा संपादित किया जाता है।
        भोजन के पाचन क्रिया का लंबा व जटिल कार्य चबाने की क्रिया से प्रारंभ होता है। जब हम भोजन मुंह में  चबाते  है तब लार ग्रंथि से लार आहार के ग्रास को गीला और स्निग्ध करना भी लार  ग्रंथि का कार्य है ताकि वह सहज में निगला जा सके । कई बार हम यह देखते हैं कि जब कभी हमारी नजर स्वादिष्ट खाने पर पड़ती है या हम स्वादिष्ट खाना खाते हैं, हमारे मुंह में 'पानी' आ जाता है| ऐसा लार ग्रंथियों द्वारा पैदा होने वाली लार के कारण होता है| एंजाइमों का स्राव कर लार ग्रंथियां रसायनिक पाचन में मदद करती हैं| मनुष्य की लार में एक एंजाइम पाया जाता है जिसे सलिवेरी एमाइलेज (लार एमाइलेज) (salivary amylase) कहते हैं|  इसलिए, स्टार्च या  कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुंह से ही शुरु हो जाता है, परन्तु मुह मे अधिक देर न रहने की वजह से मुंह में भोजन का पाचन अधूरा रह जाता है। लार मे टायलिन एंजाइम पाया जाता है यह एजाइम स्टार्च का पाचन  कर कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लूकोस में बदल देता है। यहां से भोजन  नली द्वारा अमाशय में चला जाता है यह लगभग 3 घंटे तक रहता है इस अवधि में विभिन्न पाचक रसों के साथ  पेट में करीब तीन घंटों तक पीसा जाता है| इस दौरान, भोजन और भी छोटे टुकड़ों में
digestive system in hindi

 टूटता है और एक अर्ध–ठोस पेस्ट बनता है| पेट की दीवारों में उपस्थित ग्रंथियां अमाशय रस (gastric juice) का स्राव करती हैं और इसमें तीन पदार्थ होते हैं: हाइड्रोक्लोरिक एसिड, पेपसीन एंजाइम और म्युकस| हाइड्रोक्लोरिक एसिड की उपस्थिति के कारण भोजन अम्लीय प्रकृति का होता है और पेप्सीन एंजाइम बहुत छोटे कणों को बनाने के लिए भोजन में मौजूद प्रोटीन का पाचन शुरु कर देता है।  इसके पश्चात भोजन तरल रूप में परिवर्तित होकर छोटी आत में चला जाता है।छोटी आंत आहार नली का सबसे बड़ा हिस्सा है। एक व्यस्क पुरुष में यह करीब 6.5 मीटर लंबी होती है। बहुत पतला होने के कारण इसे छोटी आंत भी कहा जाता है।  छोटी आंत हमारे पेट में एक कुंडल के रूप में व्यवस्थित होती है| मनुष्यों में छोटी आंत भोजन के संपूर्ण पाचन यानि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा, का स्थान होती है। छोटी आंत का पाचन प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण्ण योगदान होता है।
                                         छोटी आंत के प्रथम भाग ग्रहणी में जब भोजन आता है तो अग्नाशय (pancreatic) व पित्ताशय (Gall bladder) से पाचक रस आकर भोजन मेंं  मिलते हैं । इसलिए, हम कह सकते हैं कि छोटी आंत पचाये हुए भोजन के अवशोषण का मुख्य क्षेत्र है। छोटी आंत की भीतरी सतह में लाखों, उंगलियों जैसे प्रक्षेपण होते हैं जिन्हें विली(Villi) कहा जाता है। ये अवशोषण के लिए बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करते हैं और पचा हुआ भोजन हमारे रक्त में जाता है। पाचक रस आकर भोजन में मिलते हैं। और पुनः पाचन क्रिया संपादित करते हैं ।यहां से भोजन छोटी आत के अंतिम भाग शेषान्तर में चला जाता है। शेषान्तर में पहुंचकर भोजन के आवश्यक तत्व रक्त में शामिल हो जाते हैं।  भोजन में समाहित पोषक तत्व रक्त में शामिल हो , पचाए हुए और घुले हुए भोजन को शरीर के सभी अंगों तक ले जाता है। जहां यह कोशिका के रूप में समावेशित होता है। शरीर की कोशिकाएं समावेशित भोजन का प्रयोग ऊर्जा प्राप्त करने के साथ– साथ शरीर के विकास और मरम्मत के लिए भी करती हैं।
अपचा भोजन यकृत में कार्बोहाइड्रेट के रूप में जमा होता है जिसे ग्लाइकोजेन कहते हैं ।और जरूरत पड़ने पर शरीर इसका उपयोग कर सकता तथा भोजन का अवशेष बडी  आतं मे चला जाता है। जहां से यह उत्सर्जन तंत्र द्वारा मल के रूप में मल त्याग क्रिया द्वारा शरीर के बाहर उत्सर्जित कर दिया जाता है।
      

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Aloevera benefits in Hindi धृतकुमारी ALOEVERA

घृतकुमारी ALOEVERA (Aloevera Benefits in Hindi) घृतकुमारी एक औषधीय वनस्पति है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में धृत कुमारी के  औषधीय गुणो की महिमा का बहुत वर्णन किया है। इसका विधि पूर्वक सेवन करने से एक स्वस्थ व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए निरोगी जीवन व्यतीत कर सकता है तथा दूसरी ओर यदि कोई रोगी व्यक्ति रोगानुसार विधि पूर्वक इसका  सेवन करें तो वह स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता हैं। इसका पौधा भारत में सर्वत्र पाया जाता है। औषधीय गुणों के साथ साथ  सुंदर दिखने की वजह से कुछ लोग इसे गमलों में लगाकर अपने घरों में रखते है। इसमें कांड नहीं होता जड़ के ऊपर से ही चारों तरफ मासल गुद्दे से परिपूर्ण एक से दो इंच  मोटे होते हैं। इसके पत्तों को काटने पर पीताम वर्ण का पिच्छिल द्रव्य निकलता है। जो ठंडा होने पर जम जाता है, जिसे  कुमारी सार कहते हैं। वर्तमान समय में अनेक आयुर्वेदिक औषधियों में इसका प्रयोग किया जाता है। इसकी अधिक डिमांड होने की वजह से भारतवर्ष में व्यापक रूप से इसकी खेती की जाती है। शुष्क भूमि में भी इसकी खेती आसानी से हो जाती है। इसकी खेती में अधिक जल की आवश्यकता...

सफेद मूसली के फायदे।, Safedmusli benefits in Hindi

सफेद मूसली के फायदे (Safedmusli benefits in Hindi) सफेद मूसली का परिचय सफेद मूसली एक शक्तिवर्धक औषधीय वनस्पति है जिसका आयुर्वेदिक औषधियों में बहुत प्रयोग किया जाता है। सफेद मूसली के जड़ और बीज का औषधियों में अधिक महत्व होता है। आयुर्वेद में अनेकों औषधियों के निर्माण में सफेद मूसली का प्रयोग किया जाता है। विशेषकर शक्तिवर्धक और वाजीकरण औषधिओं में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ों में  कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, पोटैशियम ,फाइबर , कैल्शियम तथा मैग्नीशियम आदि तत्व पाए जाते हैं। इसका कंद औषधीय गुणों से भरपूर होता है जिसका प्रयोग अनेकों रोगों में किया जाता है। यह एक अद्भुत औषधि है।  यह कामोत्तेजक और कफ को हरने वाला माना जाता है। यह हृदय विकार और डायबिटीज जैसे रोगों में भी बहुत फायदा करता है।यह सांस के रोग में बहुत लाभकारी माना जाता है। और खून की कमी या अनिमिया जैसे रोगों को दूर करता है इसके अलावा यह अनेकों रोगों में इसका अन्य औषधियों के साथ प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है। आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि सफेद मूसली का अन्य औषधियों के साथ प्रयोग करके बहुत रोगों को नष्ट...

Mal Kangni ke fayede in hindi मालकांगनी ( ज्योतिषमति) के फायदे

मालकांगनी के फायदे (Malkangni Benefits in Hindi ) मालकांगनी एक औषधीय वनस्पति है इसे ज्योतिषमति के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसके गुणों का विस्तार से  वर्णन किया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार कई रोगों में इसका प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के महान ऋषि ने अपनी पुस्तक चरक संहिता में इस औषधि के कई रोगों में प्रयोग के बारे में वर्णन किया है। परंतु विशेष रूप से उन्होंने इस औषधि का प्रयोग शिरोविरेचनार्थ, अपस्मार, कुष्ठ और मिर्गी जैसे रोगों में विशेष रूप से औषधीय प्रयोग करने का वर्णन किया गया है। मालकांगनी का प्रयोग तेज दिमाग, कमजोरी दूर करना, और पुरुषों के रोगों में भी प्रयोग किया जाता है। मालकांगनी की प्रकृति गरम होती है इसके फूल पीले और हरे रंग के होते हैं और स्वाद में खाने में थोड़ा कड़वापन होता है। इसके फलों, पत्तों और जड़ों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसके बीजों को औषधि के लिए अधिक प्रयोग किया जाता है। गर्म तासीर के व्यक्ति को  इसका प्रयोग अपना बल विचार करके या किसी वैद्य के निर्देशानुसार करना चाहिए। मालकांगनी के पौधे पहाड़ों और ऊंचे स्था...