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अस्थि तंत्र क्या है?, what is bone structure in Hindi?, अस्थि तंत्र का मतलब क्या होता है

हमारा अस्ति तंत्र ईश्वर की जटिल कारीगरी का एक उत्कृष्ट नमूना है जिसकी रूपरेखा अधिक से अधिक शक्ति गतिशीलता प्रदान करने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है । अस्थि तंत्र की प्रत्येक हड्डी की उसके कार्य के अनुरूप एक विशिष्ट आकृति होती है। एक व्यस्क मनुष्य के शरीर में 206 विभिन्न हड्डियां होती हैं इन सभी हड्डियों में से सबसे लंबी हड्डी जांघ की तथा सबसे छोटी  हड्डी कान की होती है।
           अस्थि तंत्र हमारे शरीर के लिए ढांचे का कार्य करता है। विभिन्न शारीरिक गतिविधियों जैसे उठना-बैठना, चलना- फिरना आदि के अतिरिक्त अस्थि तंत्र का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य शरीर के नाजुक अवयवों जैसे हृदय, फेफड़ों, मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु इत्यादि की बाह्य आघातो से रक्षा करना है ।अस्थि तंत्र के उस भाग में जहां लचक की अधिक आवश्यकता होती है वहां हड्डियों का स्थान उपास्थि ले लेती है। वास्तव में हमारी हड्डियां मुड नहीं सकती किंतु जहां दो विभिन्न हड्डियां एक दूसरे से मिलती हैं वह संधि-स्थल कहलाता है संधि-स्थल पर हड्डियां अपनी जगह पर अस्थि- बंन्धको द्वारा मांसपेशियों द्वारा जमी होती है। संधि स्थल पर हड्डियों के अंतिम सिरे उपास्थि द्वारा आहत होते हैं ताकि दोनों हडिया एक दूसरे से परस्पर रगड़ न खाएं।
हड्डी की संरचना :-- हड्डी की बाहरी परत यानी कंपैक्ट बोन है हवर्ससियन  कैनालह नामक सूक्ष्म कोशिकाओं के इर्द-गिर्द   घेरा बनाए अनगिनत छोटे-छोटे सैल्स के संयोग से बनती हैं। प्रत्येक हैवर्सियन व कैनालह के अंदर रक्त शिराएं होती हैं। जो हड्डियों के सैल्स को भोजन तथा ऑक्सीजन उपलब्ध करवाती हैं। हड्डी के बीच के हिस्से की संरचना मधुमक्खी के छत्ते की भातिं होती है। हड्डी के मध्य में अस्थि मज्जा होती है यह एक वसीय पदार्थ होता है जो प्रतिदिन लाल रक्त कणों का निर्माण करता है। इसके अतिरिक्त हमारी हड्डियां कुछ आवश्यक रसायनों जैसे कैल्शियम तथा फास्फोरस का भी संचय करती हैं ताकि शरीर द्वारा आवश्यकता पड़ने पर पूर्ति की जा सके।

त्वचा :-- हमारी त्वचा एक ऐसा लचीला वह जलसहय  आवरण है जो हमारे शरीर की न केवल हानिकारक जीवाणुओं से रक्षा करता है बल्कि जो कुछ हमारे आसपास उपस्थित है अथवा घट रहा है उसकी अनुभूति भी हमें इसी से होती है।  हमारी त्वचा मुख्य रूप से दो परतों में बटी है- बाहरी परत को बाह्य  त्वचा तथा भीतरी परत को अंतर  त्वचा कहते हैं। त्वचा जिसे हम देखते हैं वह वाह्य  है जो त्वचा के मृत सैल्स से निर्मित होती है। इन मृत सैल्स में दो विशिष्ट केरादिन वह मैलानिन होते हैं ,जो त्वचा को क्रमशः कठोरता व रंगत प्रदान करते हैं ।बाह्य   त्वचा के नीचे अंतर त्वचा होती है जिसमें  वायु रक्त शिराएं, बालों की लड़े वह तैलीय ग्रंथियां तथा पसीना उत्पन्न करने वाली सफेद ग्रंथियां होती है।

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