वर्तमान समय में आयुर्वेद का स्वरूप और महत्व
आज आधुनिक युग में आयुर्वेदिक शिक्षा पद्धति को विश्व स्तर पर अपनाया जा रहा है । यद्यपि यह भारतवर्ष की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है । अभी कुछ दिन पहले ही भारत सरकार ने आयुष मंत्रालय की स्थापना की है जिसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया गया है। मंत्रालय ने 7 से 9 नवम्बर 2014 को नई दिल्ली में छठे विश्व आयुर्वेद सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें देश और विदेश से लगभग 4000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्घाटन माननीय लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन द्वारा किया गया और इसके समापन समारोह को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। छठे विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के अवसर पर मंत्रालय ने अपने सहयोगी भागीदार विश्व आयुर्वेद फाउंडेशन के माध्यम से दिल्ली में राष्ट्रीय स्तरीय आरोग्य एक्सपो (6-9 नवम्बर के 2014) का आयोजन भी किया। वर्तमान समय में सरकार ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के विकास लेकर अपनी नीतियों को स्पष्ट किया।
आयुर्वेद चिकित्सा के विषय में सरकार की सुदृढ़ नीति और प्रयासों से आयुर्वेद में शिक्षण एवं प्रशिक्षण के विकास के कारण अब इसे विशिष्ट शाखाओं में विकसित किया गया है। जो इस प्रकार हैं ---
आयुर्वेद चिकित्सा के विषय में सरकार की सुदृढ़ नीति और प्रयासों से आयुर्वेद में शिक्षण एवं प्रशिक्षण के विकास के कारण अब इसे विशिष्ट शाखाओं में विकसित किया गया है। जो इस प्रकार हैं ---
(1) आयुर्वेद सिद्धांत (फंडामेंटल प्रिंसीपल्स ऑफ आयुर्वेद)
(2) आयुर्वेद संहिता
(3) रचना शारीर (एनाटमी)
(4) क्रिया शारीर (फिजियोलॉजी)
(5) द्रव्यगुण विज्ञान (मैटिरिया मेडिका एंड फार्माकॉलाजी)
(6) रस शास्त्र (इंटर्नल मेडिसिन)
(12) रोग निदान (पैथोलॉजी)
(13) शल्य तंत्र (सर्जरी)
(14) शालाक्य तंत्र (आई. एवं ई.एन.टी.)
(15) मनोरोग (साईकियाट्री)
(16) पंचकर्म
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली (Rashtriya Ayurved Vidyapeeth, New Delhi)
आर ए वी, आयुष विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है और सोसायटी अधिनियम, 1860 के तहत 1988 में पंजीकृत है।
आर ए वी गुरु शिष्य परम्परा अर्थात् ज्ञान के हस्तांतरण की पारंपरिक विधि के अंतर्गत 28 साल की उम्र से कम के आयुर्वेदिक स्नातकों और 33 साल की उम्र से कम के स्नातकोत्तरों को उन्नत व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (MRAV) के सदस्य का दो साल का पाठ्यक्रम आयुर्वेदिक संहिताओं तथा उस पर टिप्पणियों का ज्ञान प्राप्त करने और संहिताओं के लिए अच्छा शिक्षक, अनुसंधानकर्ता और विशेषज्ञ बनने के लिए ज्ञानार्जन हेतु साहित्यिक अनुसंधान की सुविधा प्रदान करता है। जिन छात्रों ने आयुर्वेद में स्नातकोत्तर पूरा कर लिया है उन्हें अपनी स्नातकोत्तर डिग्री से सम्बन्धित संहिता के महत्वपूर्ण अध्ययन के लिए भर्ती किया जाता है। शिष्यों को अध्ययन के लिए उठाए गए मुद्दों पर बातचीत और चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलता है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (CRAV) के एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स में आयुर्वेदाचार्य (बीएएमएस) या समकक्ष डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को विशेष आयुर्वेदिक नैदानिक प्रथाओं पर प्रख्यात वैद्यों और पारंपरिक चिकित्सकों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे आयुर्वेद में अच्छे चिकित्सक बन सकें।
इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश अखिल भारतीय आधार पर विज्ञापन के माध्यम से लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद किया जाता है। साथ ही दोनों पाठ्यक्रमों के छात्रों को समय - समय पर लागू दैनिक भत्ते के साथ रु. 15820 / - मासिक वजीफा दिया जाता है। MRAV के छात्रों को 2500 प्रति माह की अतिरिक्त राशि दी जाती है।
अधिक जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर जाएँ: राष्ट्रीय आर्युेवेद विद्यापीठराष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) जयपुर
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान 1976 में भारत सरकार द्वारा देश में आयुर्वेद के शीर्ष संस्थान के रूप में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली के शिक्षण और सभी पहलुओं में प्रशिक्षण और अनुसंधान के उच्च मानक विकसित करने के लिए स्थापित किया गया था।
यह संस्थान अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएच.डी शिक्षण, निदान और अनुसंधान में संलग्न है और राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर से संबद्ध है। बीएएमएस के यूजी कोर्स में प्रवेश विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा के आधार पर किया जाता है। पीजी कोर्स में प्रवेश एनआईए और IPGTRA (वैकल्पिक) द्वारा किए गए अखिल भारतीय संयुक्त पीजी प्रवेश टेस्ट के आधार पर किया जाता है।
अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर यहां जाएँ: राष्ट्रीय आर्येुवेद संस्थानआयुर्वेद का स्नातकोत्तर शिक्षण व अनुसन्धान संस्थान, जामनगर (गुजरात)
आयुर्वेद का स्नातकोत्तर शिक्षण व अनुसन्धान संस्थान, जामनगर (गुजरात), गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय का घटक, आयुर्वेद के लिए सबसे पुराना स्नातकोत्तर शिक्षण और अनुसन्धान केन्द्र है।
संस्थान के अस्पताल रोगियों को इनडोर और आउटडोर की सुविधा प्रदान करते हैं. पंचकर्म, क्षारसूत्र और क्रिया कल्प आदि जैसी विशिष्ट उपचार प्रक्रियाएं अस्पतालों में विभिन्न रोगों के लिए प्रदान की जा रही हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें